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28th March, 2010
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  स्वरोदय ज्ञान  
 

स्वरोदय ज्ञान

     नासिका में से जो श्वास निकलता है उसे स्वर कहते है ।स्वर का संबंध नाडीयो से होता है । शरीर में नाडीयाँ ज्यादा है, पर उसमें मुख्य नाडीयाँ 24 है, उसमें भी मुख्य नाडी तीन है । उसके नाम इंगला, पिंगला, सुषुम्ना । दक्षिण यानि दायी ओर के नाकसे जो श्वास निकले वह है इंगला, जिसको हम सूर्यस्वर के नाम से पहचानते है । बायीं ओर के नाक से जो श्वास निकले वह है पिंगला, जिसको हम चन्द्र स्वर के नाम से पहचानते है । और दोनो श्वास नाडी जब चल रही हो तो उसे कहते है सुषुम्ना ।

 

1.      शीतल और स्थिर कार्य करने हो, जैसे की नया मंदिर बनवाना, प्रतिष्ठा करवानी, मूल नायक भगवान की स्थापना, ध्वज दंड, कलश चढाना, उपाश्रय, धर्मशाळा, दानशाळा, ज्ञानभंडार, घर, दुकान, महेल, माला पहननी, दीक्षा देनी, नगरमें प्रवेश करना, कपडे झवेहरात (दागिने) करवाने यह सब कार्य चन्द्र स्वर में करने चाहिये, उससे सब कार्य सिद्ध होते है ।

2.      क्रूर ओर चर कार्य करने हो, जैसे की ध्यान-साधना करना, मंत्र और देव की आराधना करनी, राज्यमें अरजी करनी, वकीलात करनी, दुश्मन के साथ मैत्री करनी, सर्प का विष तथा भूत-प्रेत को निकालना, रोगी को दवाई देना, हाथी-घोडा-रथ आदि लेना, कष्ट देने वाली स्त्री का उपाय करना, भोजन करना, स्नान करना, सामुद्रिक सफर करना, नदीमें तीरना, यह सब कार्य सूर्य स्वर में करने चाहिये, उससे सब कार्य सिद्ध होते है।

3.      जब चन्द्र स्वर बंध हो और सूर्य स्वर चालु होने वाला हो तब या जब सूर्य स्वर बंध हो और चन्द्र स्वर चालु होने वाला हो तब 5-7 मिनिट के लीए दोनो नाक में से श्वास निकलता है, उसे सुषुम्ना नाडी बोलते है और उस वक्त कोई कार्य नही करना चाहीए, करे तो सफल नही होता और क्लेश होता है ।

4.      शुक्लपक्ष के 15 दिन का स्वामी चन्द्र है, और कृष्णपक्ष के 15 दिन के स्वामी सूर्य है ।

5.      सुदि एकम की सुबह यदि चन्द्र स्वर चले तो पुरा सप्ताह अच्छा जाता है ।

6.      वदि एकम की सुबह यदि सूर्य स्वर चले तो पुरा सप्ताह अच्छा जाता है । उससे उलटा हो तो क्लेश और धन हानी होती है ।

7.      शुक्लपक्षकी शुरुआतकी पहली तीन तिथि चन्द्रकी,तथा दुसरी तीन तिथि सूर्यकी होती है, तीसरी तीन तिथि चन्द्र की, चोथी तीन तिथि सूर्य की, पांचवी तीन तिथि चन्द्र की, तिथि वाला स्वर उस दिन चल रहा हो तो शुभ अन्यथा खराब ।

 

8.      कृष्णपक्षकी शुरुआतकी पहली तीन तिथि सूर्यकी,तथा दुसरी तीन तिथि चन्द्र की होती है, तीसरी तीन तिथि सूर्य की, चोथी तीन तिथि चन्द्र की, पांचवी तीन तिथि सूर्य की, तिथि वाला स्वर उस दिन चल रहा हो तो शुभ अन्यथा खराब ।

9.      जो कोइ भी मनुष्य स्त्री के पुरुष कोइ भी कार्य से बहार जा रहा हो, तो हरएक वक्त जो भी स्वर चलरहा हो उस बाजु का कदम पहले उठाये । एसे ही उसी पग के पांच सात डग ओर भरने और पांच, सात या नौ नवकार गिनना मनमें चिमतन किया हुआ काम होता है । दोनो श्वर चल रहे हो तो 10 मिनिट रुक जाये, फिर श्वर देखके निकले ।

10.  सूर्य के वारः- शनि, रवि, और मंगळ यह तीन वार सूर्य के है ।

11.  चन्द्र के वारः- सोम, बुध, गुरु और शुक्र यह तीन वार चन्द्र के है ।

12.  सूर्य की राशिः- मेष, कर्क, तुला, मकर, चार राशि सूर्य की है ।

13.  चन्द्र की राशिः- वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ चार राशि चन्द्र की है ।

14.  सुष्माकी राशिः- मिथुन, कन्या, धनु, मीन चार राशि सुष्माकी है ।

15.  यदि कोइ पुरुष या स्त्री अपने कीसी भी प्रकारके प्रश्न पुछने आए और अपने सामने खडा हो, बायीं तरफ खडा हो या उंचाइ पर बेठकर प्रश्न पुछे और उस समय अपना चन्द्र श्वर चल रहा हो तो कहना तेरा कार्य सिद्ध होगा । इस प्रकार से नहो तो कार्य निश्फल जाता है ।

16.  यदि कोइ पुरुष या स्त्री अपने कीसी भी प्रकारके प्रश्न पुछने आए और अपने नीचे, पीछे या दायीं ओर खडा रहकर प्रश्न पुछे और उस समय अपना सूर्य श्वर चल रहा हो तो कहना तेरा कार्य सिद्ध होगा । इस प्रकार से न हो तो कार्य निश्फल जाता है ।

17.  उपर कहे हुए चन्द्रश्वर और सूर्यश्वर इन दोनो में पांच तत्व समाये हुए है । वह भी जानने योग्य है ।

18.  पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, और आकाश यह पां तत्व है, उसमें पृथ्वी और जल का स्वामी चन्द्रश्वर है । और अग्नि, वायु, आकाश का स्वामी सूर्यश्वर है । पृथ्वी का रंग पीला, जल का रंग सफेद, अग्नि का रंग लाल, वायु का रंग हरा और आकाश का रंग काला है ।

19.  एक एक श्वर एक एक घंटा चलता है

 
     
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